असम में एनआरसी धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और मुस्लिमों को राज्यविहीन करने का एक साधन है। ये आरोप लगया है अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों पर बनी एक संघीय संस्था यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने।

असम में एनआरसी धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और मुस्लिमों को राज्यविहीन करने का एक साधन है। ये आरोप लगया है अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों पर बनी एक संघीय संस्था यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने। यह अल्पसंख्यकों को लेकर भारत सरकार पर बड़ा आरोप है।

अमेरिकी संस्था यूएससीआईआरएफ ने शुक्रवार को ‘इशू ब्रीफ: इंडिया’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एनआरसी धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का एक माध्यम है और विशेषकर भारतीय मुस्लिमों को राज्यविहीन बनाना भारत के अंदर धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियों में गिरावट का एक और उदाहरण बन गया है। नीति विशेषज्ञ हैरिसन अकिंस ने यह रिपोर्ट तैयार की है।

यूएससीआईआरएफ ने शुक्रवार को कहा कि असम के भारतीय नागरिकों को मान्यता प्रदान करने वाली एनआरसी की अंतिम सूची में 19 लाख निवासियों का नाम शामिल नहीं किया गया है। संस्था ने कहा कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चिंता जाहिर की है कि असम के बंगाली मुस्लिम समुदाय को मताधिकार से वंचित करने, बड़ी संख्या में मुस्लिमों को संभवत: राज्यविहीन करने के लिये एनआरसी एक लक्षित तंत्र के समान है।

असम में एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शुरू की गयी। इसके तहत राज्य के करीब 3.3 करोड़ लोगों को यह साबित करना था कि 24 मार्च 1971 से पहले वे भारत के नागरिक थे। असम में एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी की गयी थी जिसमें 19 लाख से अधिक आवेदकों के नाम शामिल नहीं किये गये हैं।

loading...