पिछले कुछ दिनों से भारत में Twitter India का जमकर विरोध हो रहा है। कभी ट्विटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पर जातिवादी भेदभाव के आरोप लग रहे हैं तो कभी ब्लू-टिक देने के मामले में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। हजारों की संख्या में नाराज़ लोगों की सक्रियता का आलम ये है कि बिना किसी आईटी सेल की मदद से पिछले एक हफ्ते में कई टॉप ट्रेंड करवाए जा चुके हैं।

किए गए ट्वीट की संख्या देखकर, इसे ट्विटर के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की संज्ञा दी जा सकती है।

उदाहरण के तौर पर अभी ट्रेंड हो रहा #cancelallBlueTicksinIndia को अबतक  80 हजार से ज्यादा लोगों द्वारा ट्वीट-रिट्वीट  किया जा चुका है। लोग मांग कर रहे हैं कि ट्विटर पर वेरीफिकेशन करने और ब्लूटिक देने का क्राइटेरिया फिक्स किया जाए, या रद्द किया जाए। ऐसा क्यों है कि तमाम लोगों के पास फॉलोअर की संख्या बहुत कम होने पर और खुद की कोई विशेष पहचान ना होने पर भी ब्लू-टिक मिल जाता है और दलित पिछड़े आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज के बड़े बड़े संगठनों और नेताओं को ब्लू-टिक देने में आनाकानी की जाती है।

ध्यान देने की बात है कि जो लोग राजनीतिक दलों में बड़े पदों पर हैं और किसी न किसी रूप में सत्ता के भागीदार रहे हैं उन्हीं को छोड़कर अधिकतर दलित पिछड़े नेताओं को ब्लू-टिक नहीं दिया गया है।

लेखक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बहुजन समाज के लोग कितनी भी ख्याति प्राप्त कर लें उन्हें आसानी से ब्लू-टिक नहीं मिल पाता है।

इन्हीं बातों से नाराज होकर हजारों की संख्या में लोग ट्विटर इंडिया के खिलाफ मुहिम छेड़ चुके हैं।

जानें- कहां से शुरू हुआ विवाद

वैसे तो ट्विटर पर जातिवादी भेदभाव के आरोप बहुत पहले से लग रहे हैं लेकिन हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने मामले को तूल दे दिया और हजारों असंगठित सोशल मीडिया यूजर्स को एक संगठित ईकाई के रूप में बदलकर तमाम हैशटैग को टॉप ट्रेंड करवा दिया।

क्या ट्विटर पर जातिवाद का आरोप जायज़ है?

क्या ट्विटर पर जातिवाद का आरोप जायज़ है?हाल में सोशल मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म ट्वीटर को लेकर जातीवादी बहस तेज हो गई है. "हम भी भारत" कार्यक्रम के इस भाग में द वायर की सीनियर एडिटर आरफा खानम शेरवानी इस विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रतनताल, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और द वायर की सोशल मीडिया एडिटर नाओमी बारटॉन से बातचीत कर रही हैं.

Posted by The Wire Hindi on Wednesday, November 6, 2019

दरअसल प्रो. दिलीप मंडल के ट्विटर अकाउंट पर ये कहकर पाबंदी लगा दी गई थी कि उन्होंने मार्च महीने में अपने एक सहयोगी अनिल यादव के कांटैक्ट नंबर को ट्विटर पर शेयर कर दिया था। ट्विटर द्वारा लिए गए इस एक्शन के पीछे जातिवादी साजिश की आशंका जताते हुए दिलीप मंडल और उनके समर्थकों ने #RestoreDilipMandal को ट्रेंड करवाया।

कुछ ही घंटों बाद ट्विटर को अपने फैसले को वापस देना पड़ा और दिलीप मंडल की आईडी पर से लगाई गई पाबंदी हटानी पड़ी। उसके बाद सोशल मीडिया पर एक्टिव तमाम साथियों के साथ मिलकर उन्होंने #SackManishMaheshwari(मनीष महेश्वरी ट्विटर इंडिया के MD हैं) चलाया और उसके ठीक बाद #CasteistTwitter के साथ हजारों लोग ट्वीट और रिट्वीट करने लगे और ये भारत में नंबर वन पर ट्रेंड करने लगा।

अब तमाम यूजर अपना अनुभव शेयर करने लगे और इस बात का आरोप लगाने लगे कि ट्विटर जातिवादी भेदभाव करता है। और भेदभाव के प्रतिक्रिया स्वरूप #JaiBhimTwitter चलाया गया। यह भी नेशनल लेवल पर नंबर वन ट्रेंड कर गया।

अब ट्विटर के खिलाफ एकजुट हुए हजारों लोग एक संगठित इकाई के रूप में काम करने लगे, भेदभाव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और #ब्राह्मणवादीट्विटर ट्वीट किया। हालांकि इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप टि्वटर यूजर्स का एक ग्रुप अपनी नफरत व्यक्त करते हुए जय_भीम_जय गोबर का हैश टैग भी ट्रेंड करवाया। अब इसके जवाब में दलित पिछड़ों और आदिवासियों के आईकन के नाम के साथ मिला-जुला ट्वीट #JaiBhimJaiMandalJaiBirsa को भी ट्रेंड करवाया गया और यह भी टॉप ट्रेंड में शामिल हुआ।

इसी बीच प्रोफेसर रतन लाल के भी टि्वटर आईडी पर रोक लगा दी गई और आरोप लगाया गया कि उन्होंने किसी का फोन नंबर ट्वीट किया था। भले ही उन्होंने किसी की सहमति से वह फोन नंबर ट्वीट किया था लेकिन ट्विटर ने सख्त एक्शन लिया, जिसके खिलाफ और ज्यादा संख्या में संगठित होते हुए लोग ट्विटर की मंशा पर सवाल उठाने लगे कि दलित पिछड़ों को चुन चुन कर क्यों टारगेट किया जा रहा है।

इस बीच प्रोफेसर दिलीप मंडल को ब्लू टिक दे दिया गया था और वह विरोध स्वरूप इसे वापस करने का हैशटैग चला रहे थे। क्योंकि ब्लू टिक देने की ट्विटर की पॉलिसी को एकसमान नहीं माना जा रहा है इसलिए उसको हटाने के लिए #RemoveBlueTickOfDilipMandal भी ट्रेंड करावाया गया और अब हजारों हजार की संख्या में संगठित होकर लोग #verifySCSTOBCMinority का ट्रेंड चलाने लगे। जिसपर ट्विटर की तरफ से कोई खास प्रतिक्रिया और कोई जवाब नहीं आया तो लोग लिखने लगे-#twitterhatesSCSTOBCMuslims

इस बीच तमाम नाराज लोग #बेशर्मजातिवादीट्विटर जैसे हैशटैग इस्तेमाल करते रहे।

अब तक आम राय बन चुकी थी कि ब्लू टिक के नाम पर भेदभाव किया जाता है और प्रतिक्रिया स्वरुप हजारों लोग संगठित होते हुए #cancelallBlueTicksinIndia ट्रेंड करवाना शुरू कर दिया।

हर घंटे हजारों लोगों द्वारा किया जा रहा ट्वीट और रिट्वीट इस बात की ओर संकेत दे रहा है कि भारी संख्या में लोग ट्विटर की नीयत पर शक जाहिर कर रहे हैं। उनकी मांग है कि ब्लू टिक देने का कोई एकसमान क्राइटेरिया फिक्स किया जाए, अगर ब्लू-टिक के लिए आईडी वेरीफाई करना है तो वेरीफाई करें और सबको ब्लू-टिक दें नहीं तो अभी तक दिए गए सभी के ब्लू-टिक को वापस लें।

ऐसा नहीं है कि ट्विटर के खिलाफ इस तरह की घेराबंदी में सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे हैं। तमाम राजनीतिक दलों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। जहां ‘दलित कांग्रेस’ के अकाउंट से बहुजन सॉलिडेरिटी दिखाई गई, वहीं पर दिल्ली सरकार में समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी लगातार इन तमाम ट्रेंड्स को ट्वीट और रिट्वीट कर रहे हैं। यानी असंगठित रूप से शुरू किया गया ट्रेंड धीरे-धीरे संगठित होते हुए एक बड़ी मांग बनता जा रहा है।

ध्यान देने की बात है कि टि्वटर इंडिया द्वारा अकाउंट वेरीफिकेशन का कोई फिक्स क्राइटेरिया नहीं है इसलिए तमाम गैर-जिम्मेदार लोगों के ट्विटर अकाउंट को भी ब्लू-टिक मिला हुआ है मगर वंचित समाज की आवाज उठाने वाले तमाम पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और न्यूज़ पोर्टल्स के ट्विटर अकाउंट को वेरीफाई करने में आनाकानी किया जाता है।

लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय और हजारों लोगों द्वारा फॉलो किए जाने वाले Times Media 24 जैसे न्यूज़ पोर्टल्स को भी ब्लू-टिक देने में आनाकानी करना हैरान करता है। फेक न्यूज़ के इस दौर में न्यूज़ पोर्टल्स की प्रमाणिकता अगर मायने रखती है तो इसकी अनदेखी करके ट्विटर ही कहीं न कहीं फेक ID और फेक न्यूज़ को बढ़ावा दे रहा होता है।

ऐसे में नाराज़ लोगों द्वारा चलाए जा रहे इस तरह के ट्रेंड कहीं न कहीं वाजिब लगते हैं।

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