न्यूजीलैंड के इतिहास में सबसे बड़े आतं’कवादी हमले को अंजाम देने वाला ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रेंटन टॉरेंट ने कहा कि वो क्राइस्टचर्च की दोनों बड़ी मस्जिदों को तबाह कर देना चाहता था और उसने इसीलिए नमाज के समय को चुना था, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वो निशाना बना सके।

ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, टॉरेंट ने अपनी सजा की सुनवाई के दौरान इस बात को कुबूल किया है।

क्राइस्टचर्च में पिछले साल 15 मार्च को हुए इस ह’मले को न्यूजीलैंड के इतिहास का सबसे बड़ा आतं’कवादी ह’मला करार दिया गया। जिसमें 51 लोगों की जान चली गई, तो 40 से अधिक लोग घायल हो गए।

अब इस मामले में टॉरेंट पर मु’कदमा चलाया जा रहा है। टॉरेंट ने इस ह’मले की लाइव स्ट्रीमिंग भी की थी। इस शूटिंग के बाद उसे उस समय गिर’फ्तार कर लिया गया था, जब वो तीसरी मस्जिद को निशाना बनाने जा रहा था।

ब्रेंटन टॉरेंट को 51 लोगों की ह’त्या, 40 लोगों की ह’त्या और आतं’कवादी गतिविधियों को अंजाम देने का दो’षी पाया जा चुका है। उसकी सजा पर बहस चार दिनों तक चलेगी।

ब्रेंटन टॉरेंट ने खुद कोर्ट रूम में दर्ज अपने बयान मेें ये बातें कही हैं. ब्रेंटन टॉरेंट की उम्र अभी 29 साल है और उसके निशाने पर अ’वैध अति’क्रमण कारी और मूलत: गैर यूरो’पीय प्रवासी ही थे, इसीलिए उसने मस्जिदों को ही त’बाह करने का फैसला लिया था।

कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक टॉरेंट साल 2017 में न्यूजीलैंड आया था और आने के साथ ही ताकतवर हथि’यारों को जमा करना शुरू कर दिया था।

टॉरेंट ने कम से कम 7000 राउंड गो’लीबारी की व्यवस्था की थी। टॉरेंट ने पुलि’सवालों से कहा था कि वो मस्जिदों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाने की पूरी प्लानिंग करके आया था।

ब्रेंटन टॉरेंट ने जानबूझकर अल नूर मस्जिद और लिनवूड इस्लामिक सेंटर को चुना था। उसके खि’लाफ 26 पेज के आरोप पत्र में सारी बातों का जिक्र किया गया है।

टॉरेंट के पास मॉसबर्ग 930 सेमी ऑटोमेटिक के 12 शॉटगन (Mossberg 930 semiautomatic 12 gauge shotgun) और विंढाम कंपनी की.223 कैलिबर की एमएसएसए रा’इफल (Windham Weaponry .223 calibre MSSA rifle) के साथ अन्य हथि’यार भी थे। अगले चार दिनों तक उसकी सजा को लेकर कोर्ट सुनवाई करती रहेगी।

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