नई दिल्लीः देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई अब ग्लोबल बैंकों में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है और इसीलिए काफी समय से इसके 5 सहयोगी बैंकों के विलय का ये बैंक इंतजार कर रहा है. हालांकि आज एसबीआई के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है और सरकार ने एसबीआई व इसके 5 सहयोगी बैंकों की विलय योजना को आज सैद्धांतिक मंजूरी दे दी. हालांकि केंद्र सरकार ने भारतीय महिला बैंक के बारे में कोई फैसला नहीं किया है.

एसबीआई में उसके सब्सिडियरी बैंकों को मिलाने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया. बैठक के बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा, ‘मंत्रिमंडल ने (विलय) प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. इन बैंकों के बोर्डों के पास ये प्रस्ताव गए थे जिन्होंने उसे मंजूरी दे दी थी. बैंकों के निदेशक मंडलों की सिफारिशों पर आज विचार हुआ और मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.’ जिन सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय किया जाना है उनमें स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक आफ मैसूर (एमबीएम), स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर (एसबीटी), स्टेट बैंक आफ पटियाला (एसबीपी) व स्टेट बैंक आफ हैदराबाद (एसबीएच) है.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री ने कहा, ‘इस विलय के बाद यह एक बहुत बड़ा बैंक बन जाएगा, घरेलू लिहाज से ही नहीं बल्कि आकार के हिसाब से वैश्विक स्तर पर भी.’ मंत्री ने कहा कि इस विलय से जहां इन बैंकों की कोष लागत घटेगी वहीं ऑपरेशनल कॉस्ट में भी कमी आएगी. प्रस्तावित मर्जर के बाद एसबीआई का ऐसेट बेस 37 लाख करोड़ रुपये का होगा जबकि इसकी कुल ब्रांच की संख्या 22,500 होगी.

भारतीय महिला बैंक के विलय के एसबीआई में विलय के प्रस्ताव पर जेटली ने कहा,‘ अभी इस पर विचार हो रहा है. हमने इस बारे में आज कोई फैसला नहीं किया.

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