सऊदी अरब को क्रूड ऑइल यानी कच्चे तेल उत्पादन का गण माना जाता है. कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट आई थी कि जिसमें कहा गया था कि अमेरिका अब तेल उत्पादकों कि लिस्ट में नंबर 2 की श्रेणी में शामिल हो गया है, लेकिन अब सऊदी अरब के हाथ ऐसी तकनीक लगी है जिससे उसे तेल ख़त्म होने का डर नहीं सताएगा. अब सऊदी अरब की नजरें ऐसे संसाधन पर हैं जिससे सऊदी में तेल कभी खत्म नहीं होगा.

सऊदी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तेल पर ही निर्भर है, अब उसे सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. सऊदी को एक ऐसी तकनीक मिली है, सऊदी में जल्द ही ऐसे तरीके से बिजली पैदा की जाएगी, जो कभी किसी ने नहीं सोचा था. ज़मीन से निकलने वाली इंफ्रारेड रेडिएशन को बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बिजली बनेगी.

डायोड इंफ्रारेड से मिलने वाले अलटर्नेटिंग करंट को डायरेक्ट करंट में बदल देंगे. फिर इस करंट से बड़ी-बड़ी बैटरी चार्ज की जाएंगी. इसे बहुत बड़े स्तर पर करने की तैयारियां की जारी है, जिससे कई शहरों को बिजली दी जा सकेगी.

डायोड इंफ्रारेड से मिलने वाले अलटर्नेटिंग करंट को डायरेक्ट करंट में बदल देंगे। फिर इस करंट से बड़ी-बड़ी बैटरी चार्ज की जाएंगी. इसे बहुत बड़े स्तर पर करने की प्लानिंग की गई है, जिससे कई शहरों को बिजली दी जा सकेगी.

सोलर एनर्जी का किया जाएगा इस्तेमाल

सऊदी अरब अपने इस नए प्लान पर काम करना शुरू कर चुका है. यहां ACWA पावर नाम की एक कंपनी को एक प्रॉजेक्ट सौंपा गया है. इसमें उसे रियाद में एक सोलर फॉर्म बनाना है, जिसका मकसद दो लाख घरों को बिजली देना होगा. इस प्रॉजेक्ट में 300 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा. सऊदी के इस प्रोजेक्ट के काफी फ़ायदे होने वाले है. बिजली मिलने के साथ-साथ कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा.

सोलर एनर्जी बनाने के लिए सऊदी बेहतरीन जगह साबित हो सकती है क्योंकि वहां मौसम खासा गर्म रहता है. अब अमेरिका और सऊदी बीच कड़ी टक्कर होगी.

यहां क्लिक करें और पढ़ें

Loading...