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नई दिल्ली: असम के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स-एनसीआर) प्रकाशित होने की आखिरी तिथि 30 जुलाई है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि किसी को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सभी वास्तविक भारतीयों को अपनी नागरिकता साबित करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे।

अपने कई ट्वीट में उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षरित ‘असम समझौते’ के अनुरूप इस रजिस्टर का प्रकाशन किया जा रहा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को प्रकाशित होने वाला एनआरसी सिर्फ एक मसौदा है। इस पर दावों और आपत्तियों के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अवसर दिया जाएगा।

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गृह मंत्री ने आश्वस्त किया कि पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से एनआरसी की कवायद चल रही है और यह काम इसी तरह जारी रहेगा। सभी लोगों को कानून के तहत उपलब्ध सभी उपायों का पर्याप्त मौका मिलेगा। प्रक्रिया के हर चरण में सभी लोगों को अपनी बात कहने के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया चल रही है और उचित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत लगातार इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही है।

ये मुद्दा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी उठा था। एआईडीयूएफ के मुखिया बदरुद्दीन अजमल ने भी ये मुद्दा उठाया था। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य में बाढ़ की स्थिति के कारण दो जुलाई को इसके प्रकाशन की अंतिम तिथि 30 जून से एक महीने के लिए बढ़ा दी थी। असम एकमात्र राज्य है, जहां एनआरसी की व्यवस्था है। पहला एनआरसी 1951 में तैयार हुआ था। उस वक्त वहां 80 लाख नागरिक थे।

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