लखनऊ. भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में योगी आदित्यनाथ सरकार ने अखिलेश यादव के एक और फैसले का रद्द कर दिया है। प्रदेश सरकार ने फायरमैन और जेल वार्डेन की भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। अब नए सिरे से आवेदन मांगे जाएंगे। अखिलेश सरकार ने वर्ष 2016 में फायरमैन के 1575 और जेल वार्डेन के 2311 पदों के लिए भर्ती को खोला था। तय किया गया था कि सभी पद सीधी भर्ती यानी सिर्फ इंटरव्यू के जरिए भरे जाएंगे। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस व्यवस्था को भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला बताते हुए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए भर्ती करने का फैसला किया है।

पहले आवेदन करने वालों को राहत नहीं मिलेगी

अखिलेश यादव के कार्यकाल में तय व्यवस्था को नकारते हुए योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुरानी व्यवस्था के तहत आवेदन करने वालों को कोई रियायत मिलेगी अथवा नहीं।

सूत्रों के मुताबिक, पुराने आवेदकों को उम्र सीमा में छूट जैसी किसी रियायत की उम्मीद नहीं है। सरकार के प्रमुख ओहदेदार ने बताया कि फायरमैन के 1575 और जेल वार्डेन के 2311 पदों पर एक जाति विशेष के अभ्यर्थियों की तैनाती की कोशिश थी, इसी कारण पूर्ववर्ती सरकार ने सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया था। पिछली व्यवस्था के तहत फायरमैन के 1575 पदों के लिए 21 दिसंबर से 4 फरवरी 2017 तक 110424 लोगों ने आवेदन किया था, जबकि जेल वार्डेन के 2311 पदों में 1759 पद पुरुषों तथा 552 पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे। इस नौकरी के लिए 229848 पुरुषों और 70541 महिलाओं ने आवेदन किया था।

अब नई नियमावली से मिलेगी सरकारी नौकरी

अखिलेश सरकार का फैसला पलटते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने तय किया है कि अब फायरमैन के 1575 और जेल वार्डेन के 2311 पदों पर नई नियमावली के तहत ही भर्ती होगी। नई व्यवस्था के मुताबिक, पहले लिखित परीक्षा होगी। इसके बाद उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, पिछली सरकार ने हुई सीधी भर्तियों में एक जाति विशेष के लोगों को तवज्जो मिलती रही थी। पड़ताल में भी सामने आया है कि तमाम भर्तियों में सफल होने वाले 70 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवार यादव जाति के थे। ऐसे में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही सरकारी नौकरी पाने के तौर-तरीकों को बदल दिया गया।

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