राजकोट। बालविवाह के कारण लड़कियां छोटी उम्र में ही गर्भवती हो जाती हैं। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 में घोषित की गई रिपोर्ट के अनुसार राजकोट के शहरी इलाके में 15 से 19 साल की उम्र में 5.6 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 2.7 प्रतिशत लड़कियां प्रेग्नेंट हो रही हैं। पूरे राज्य का आंकड़ा देखें तो राज्य में इसका प्रतिशत शहरी 4.2 और ग्रामीण का 7.9 प्रतिशत है।

ये है सच्चाई…

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे वर्ष 2005-2006 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 18 वर्ष से कम उम्र में शादी होने वाली लड़कियों की संख्या 47.4 प्रतिशत, गुजरात में 38.7 प्रतिशत थी।2015-16 के दौरान हुए सर्वे के अनुसार देश में लड़कियों की संख्या 26.8 प्रतिशत थी, तब गुजरात में 24.9 और राजकोट शहर- जिले में 15.4 प्रतिशत थी।

इसका आशय यही हुआ कि गुजरात में बालविवाह पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बच्चों की शादी अपेक्षाकृत कम हुई। इसके बाद भी ग्रामीण अंचलों में कुछ जातियों में अभी भी बालविवाह जारी हैं। बालविवाह के कारण लड़कियां छोटी उम्र में ही मां बन जाती हैं, जिसके कारण बाल मृत्युदर और गर्भवती महिला की मृत्युदर अधिक है।

जनजागृति ही एकमात्र उपाय

राजकोट के सुरक्षा अधिकारी कनकसिंह झाला ने बताया कि बाल विवाह रोकने का एक ही विकल्प है, वह है जनजागृति। इसके लिए सरकारी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। अब तहसील और जिला स्तर पर समितियां बनाई जा रही हैं, जो इस दिशा में काम करेंगी।

सजा-दंड के पात्र

-युवक- लड़की के माता-पिता

-बालविवाह में मदद करने वाले पंडित।

-लड़की या युवक की माता को सजा से मुक्त रखा गया है, परंतु वह दंड की पात्र है।

-बाल विवाह कराने वाले को कम से कम एक साल की सजा तथा 3 लाख रुपए तक का दंड का प्रावधान है।

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