नई दिल्ली: कुछ सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से शिकायत की है कि केंद्र सरकार के विभाग उनके सवालों पर विलंब से जवाब भेजते हैं. मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाया गया. अब इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सभी संबंधित विभागों के मंत्रियों को पत्र लिखा है. दिशानिर्देशों के मुताबिक सांसदों से प्राप्त किसी भी सवाल का जवाब ‘त्वरित’ दिया जाना चाहिए और 15 दिनों के अंदर इसकी पावती और अगले 15 दिनों में जवाब दिया जाना चाहिए.

दिशानिर्देश में कहा गया है कि जिन मामलों में विलंब की संभावना है, उनमें अंतरिम जवाब भेजा जाना चाहिए और अंतिम जवाब की संभावित तिथि के बारे में बताया जाना चाहिए. सांसदों के संवाद पर तुरंत ध्यान देना सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया गया है. दिशानिर्देश में आगे कहा गया है कि संसद सदस्यों से प्राप्त संवाद का उपयुक्त रिकॉर्ड रखा जाए और उनकी निगरानी होनी चाहिए.
पीएमओ में राज्यमंत्री सिंह ने पत्र में लिखा है, “प्रधानमंत्री कार्यालय को कुछ सांसदों से जानकारी मिल रही थी कि सांसदों को मंत्रालयों.. विभागों से उनके पत्रों का समय पर जवाब नहीं दिया जा रहा है.” उन्होंने कहा, “मुझे खुशी होगी अगर आप सांसदों के पत्रों का त्वरित जवाब देने के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करें और सांसदों से प्राप्त पत्रों का जवाब देने के लिए निगरानी व्यवस्था गठित करने पर विचार करें.” उन्होंने कहा कि इस बारे में यह भी सुझाव दिया गया है कि सांसदों से प्राप्त सभी पत्रों को तुरंत स्कैन किया जाए और ई-कार्यालय में अपलोड किया जाए.

यह पहला मौका नहीं है कि सांसदों ने इस मसले को उठाया हो. पहले भी कार्मिक मंत्रालय ने सभी मंत्रियों से समय पर सांसदों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए लिखा था. लगभग हर संसदीय सत्र में, मंत्रालय से देरी से दिए जाने वाले जवाबों के संबंध में सवाल किए जाते हैं.

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