सऊदी अरब में प्रवासियों पर लगाई जाने वाली नई फीस योजना न सिर्फ प्रवासी और उनके परिवारों के लिए बल्कि उनके नियोक्ताओं पर एक वित्तीय बोझ होगा। रियाद चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के एक सदस्य ने चेतावनी दी है।

अब्दुल्ला अल-मगहलौत, चैम्बर के निवेश और सुरक्षा समिति के सदस्य ने कहा, उम्मीद है यह फीस 2020 तक 65 अरब रियाल तक पहुँचेगा, लेकिन वे सऊदी अरब में काम के माहौल पर प्रतिकूल असर होगा।

“यह फीस ठेकेदारों सहित निजी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, निर्माण सामग्री, खाद्य और उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होगी। इस फीस वृद्धि से सऊदी नागरिकों को नुकसान पहुंचाया जाएगा। इस वजह से सऊदी में काम के माहौल के आकर्षण को नुकसान ही होगा।” चैंबर अधिकारी ने यह कहते हुए अल वतन दैनिक अखबार को बताया।

मगहलौत ने नुकसान को कम करने के लिए बेहतर यंत्ररचना खोजने के लिए कहा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि प्रवासियों के ऊपर फीस रियल एस्टेट बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रवासी अपनी परिवारों के साथ देश छोड़ने के लिए विकल्प चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा, बहुत सारा कार्यालयों, दुकानें और फ्लैट खाली हो जाएगा, मकान मालिक और रियल एस्टेट को इस मामले में भुगतना होगा। अल-मगहलौत ने कहा, विशेष तंत्र के माध्यम से विशेष फंड में प्रवासियों की वेतन का हिस्सा निवेश करने के लिए मौका देने चाहिए और उन्हें देश के अंदर अपनी आय का हिस्सा खर्च करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न की उन पर फीस थोपा जाए।

उन्होंने आगे कहा कि प्रवासियों पास बड़ा अनुभव है और यदि वे देश छोड़ने का फैसला करते है तो निजी क्षेत्र को भुगतना होगा। लेकिन उन्हौने यह भी कहा कि सऊदी में जरुरत से ज्यादा विदेशी श्रमिक है जो देश को जरूरत नहीं है। वे सऊदी अर्थव्यवस्था पर एक बोझ है और सऊदी नागरिकों के साथ प्रतिस्पर्धा करते है।

उन्होंने कहा कि इन अत्यधिक कामगारों के ऊपर सऊदी में रहने के लिए फीस लागु किया जाना चाहिए जो अपनी प्रायोजक के आड़ में खुद का व्यापार चला रहा है, जबकि देश को उनकी जरुरत नहीं है।

अल-मगहलौत ने कहा, “अब हमें तय करना है जिसे हम चाहते हैं और करते हैं जिसे हम नहीं चाहते हैं। हम निजी क्षेत्र के ऊपर अतिरिक्त बोझ बिना डाले अन्य विकल्प रास्ता खुजना है”।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची तेल की गिरा दाम, सिरिया और यमन में लड़ाई की वजह से सऊदी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी है। रोज़-रोज कंपनिया बंद होते जा रहे है।

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