नर्इ दिल्ली। सऊदी अरब में अच्छा कमा रहे लोग अब वहां की नीतियों में हुए बदलाव की वजह से स्वदेश लौटने को मजबूर हो गए हैं। यही नहीं हजारों की संख्या में लौट भी गए हैं। जिसमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। ताज्जुब की बात तो ये है कि जो लोग अब भारत लौटे हैं वो सऊदी अरब के मुकाबले आधी तनख्वाह में नौकरी करने मजबूर हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह से सऊदी अरब की नीतियों में हुए बदलाव को बताया जा रहा है।

नीतियों में हुए बदलाव

सऊदी अरब में सऊदी फर्स्ट की नीतियों में बड़ा बदलाव किया गया है। खासकर विदेशी लोगों को इसमें प्राथमिकता पर रखा गया है। सऊदी अरब ने विदेशियों की रहने वाली फैमिली के लिए लगने वाले फैमिली टैक्स दोगुना कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार 2020 तक इस फैमिली टैक्स आैर बढ़ा दिया जाएगा।। साथ ही बिजली, पानी और ईंधन के दामों में भारी इजाफा कर दिया गया है। जिसकी वजह से सऊदी अरब से विदेशी लोग अपने देश को लौटने पर मजबूर हो गए हैं। आपको बता दें 2017 से शुरू हुए फैमिली टैक्स के तहत रह रहे लोगों को 1828 रुपए प्रति महीने देना पड़ता था। 2018 में इसे बढ़ाकर 3656 रुपए कर दिया गया।

अमरीका की तर्ज सऊदी अरब

सऊदी अरब अब अमरीका तर्ज पर काम कर रहा है। सऊदी अरब की सऊदी फर्स्ट नीति पूरी तरह से अमरीका की तरह ही है। जानकारी के अनुसार 2020 तक सरकार ने बेरोजगारी कम करने के लिए नीति लागू किया है। इसका मतलब ये हुआ कि पहले कंपनियों में सऊदी अरब के लोगों को रोजगार दिया जाएगा। उसके बाद अगर वैकेंसी होती है तो दूसरे देशों के लोगों को नौकरियां दी जाएगी।

सऊदी अरब ने बढ़ार्इ की कीमतें

– सऊदी अरब ने दिसंबर 2017 से ईंधन के दाम दोगुने कर दिए हैं। क लीटर ऑक्टेन-91 ईंधन की कीमत दिसंबर में 75 हलाला (रियाल का सौवां हिस्सा) थी, अब 1.38 रियाल यानी 25 रुपए हो गई है।

– सऊदी अरब सरकार ने बिजली के दामों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी करते हुए तीन गुना तक बढ़ोतर कर दी गई है। जिस परिवार का बिजली का बिल 200 रियाल यानी 3600 रुपए आता था, अब उसका बिल 600 रियाल यानी 10 हजार 800 रुपए हो गया है।

– सऊदी अरब में पिछले 30 दशक से करीब 32.5 लाख भारतीय काम कर रहे हैं।

– केरल के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी और तेलंगाना के लोगों की करीब 25 फीसदी है।

– इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के लोगों का नंबर आता है।

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