आर-रहमान

नई दिल्ली: संगीतकार ए.आर.रहमान ने धर्म बदलकर इस्लाम मजहब कुछ वर्षो पहले अपनाया है.अब तक वो इस्लाम कबूलने पर चुप रहे थे लेकिन एक इंटरव्यू में उन्होंने बेबाकी से इस बारे में राय दी.उन्होंने कहाकि मुस्लिम बनने का फैसला उन्होंने अचानक नही लिया है. यह फैसला मेरा और मेरी मां दोनों का सामूहिक फैसला था.हम लोग सर्वशक्तिमान ईश्वर की शरण में आना चाहते थे.गौरतलब है कि संगीतकार ए.आर रहमान ने सन् 2006 में अपनी मां के साथ हज भी किया है.

रहमान कहते हैं-इस्लाम कबूल करने पर जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया.उन्होंने कहाकि फिल्मी-दुनिया में लोग कामयाबी के लिए मुस्लिम होते हुए हिन्दू नाम रख लेते हैं,लेकिन मेरे साथ उलटा हुआ.मैं दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान बन गया.मुझे मुस्लिम होने पर फख्र है.उन्होंने हज पर अपने अनुभव को शानदार कहा.बोले उन्होंने हर अरकान निभाया और रूहानी एहसास उन्हें मिला.

रहमान कहते है, यह 1989 की बात है जब मैंने और मेरे परिवार ने इस्लाम धर्म अपना लिया मैं तब नौ साल का था तब ही एक रहस्यमयी बीमारी से मेरे पिता गुजर गए थे.जीवन में कई मोड़ आए. वर्ष-1988 की बात है जब मैं मलेशिया में था. मुझे ख्वाब में एक बुजुर्ग ने इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कहा.
उन्होंने कहाकि पहली बार मैंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन यही सपना मुझे कई बार आया.इसके बाद मैंने यह बात अपनी मां को बताई.इस पर मां ने कहां,ये इश्वर का बुला है और इसपर हमें फक्र करना चाहिए.इस बीच 1988 में मेरी बहन गम्भीर रूप से बीमार हो गई.बहुत इलाज़ करवाया लेकिन फायदा नही हुआ लेकिन फिर हमने एक मौलवी से अल्लाह से दुआ करवाई फिर अल्लाह ने हमारी सुन ली और मेरी बहन ठीक हो गयी.इसके बाद हम लोग मुस्लिम हो गये.

रहमान कहते है कि इस्लाम कबूल करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया बल्कि इसमें हमें दस साल लगे.रहमान ने सायरा से विवाह किया है और उनके तीन बच्चे हैं,रहमान कहते है इबादत से उनका तनाव दूर हो जाता है.गौरतलब है कि रहमान भारत के बड़े संगीतकार माने जाते है.

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