नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हर रोज कई तस्वीरें, मैसेज और वीडियो वायरल होते हैं. ऐसी ही एक वायरल रिपोर्ट ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है. सोशल मीडिया पर वायरल एक रिपोर्ट के मताबिक वोटों की गिनती से पहले ही पंजाब चुनाव के नतीजे लीक हो गए हैं. इस रिपोर्ट के वायरल होने के बाद हर एक के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि वोटों की गिनती से पहले चुनाव के नतीजे कैसे लीक हो सकते हैं?

क्यों चर्चा में है रिपोर्ट?
11 मार्च को वोटों की गिनती होनी है लेकिन यहां तो सवा महीने पहले ही पंजाब के नतीजे इस रिपोर्ट के जरिए बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट पर लोग भरोसा कर रहे हैं क्योंकि इसमें देश के खुफिया विभाग का लोगो लगा हुआ है. इस रिपोर्ट को लोग अफवाह नहीं मान पा रहे क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम लिखा हुआ है. ये रिपोर्ट हलचल पैदा कर रही है क्योंकि इसमें भारत सरकार का जिक्र किया गया है.

इस रिपोर्ट में क्या है और किसको कितनी सीटें दी गई हैं?

-रिपोर्ट में सबसे ऊपर लिखा है पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 पर खुफिया विभाग की रिपोर्ट.
-2 फरवरी यानि 4 दिन पहले भारत सरकार को भेजी गई फाइनल रिपोर्ट.
-आगे लिखा है ये पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 की फाइनल रिपोर्ट है
-ये इनपुट 23 जनवरी से 1 फरवरी के बीच लिए गए हैं.
-इसमें हर पार्टी की कुल सीटें और क्षेत्रवार सीटों की जानकारी है.

वायरल रिपोर्ट में कांग्रेस को दोआब में 15, माझा में 19 और मालवा में 35 सीटें दी गई हैं यानि कुल मिलाकर 69 सीटें दी गयीं हैं. वहीं आम आदमी पार्टी को दाओब, माझा और मालवा में मिलाकर कुल 31 सीटें दी गई हैं.जबकि बीजेपी अकाली दल गठबंधन को दाओब में 4, माझा में 4 और मालवा में 8 सीटें दी गई हैं. दरअसल पंजाब को भौगोलिक आधार पर दाओब, माझा और मालवा में बांटा गया है.

रिपोर्ट में वोट शेयर भी बताया गया है
-कांग्रेस को 38. 93 फीसदी वोट
-आम आदमी पार्टी को 30 फीसदी वोट
-बीजेपी अकाली दल को 27.84 फीसदी वोट

रिपोर्ट में आंकड़े खत्म होते हैं तो नीचे लाल रंग से खुफिया रिपोर्ट लिखा हुआ है. इसके अलावा कुछ और भी चौंकाने वाली बातें रिपोर्ट में सबसे नीचे लिखी हुई हैं जैसे ये सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय के इस्तेमाल के लिए है. इस रिपोर्ट को खुफिया बनाए रखने के लिए कृपया विशेष सावधानी बरतें. जानकारी के मुताबिक हमारी पंजाब विधानसभा चुनाव पर पिछली रिपोर्ट जिसका सीरियल नंबर A0PB0219 किसी ने लीक कर दी थी और अब सार्वजनिक हो चुकी है.

अगर ये सच है तो क्या हर राज्य के चुनाव के बारे में पहले से ही पता चल जाता है कि किसको कितनी सीटें मिल रही हैं और ये रिपोर्ट 2 फरवरी के दिन की है इसलिए और चौंकाती है क्योंकि पंजाब की 117 विधानसभा सीटों के लिए 4 फरवरी को मतदान हुआ था.

एबीपी न्यूज ने वायरल रिपोर्ट की तहकीकात की
एबीपी न्यूज ने ने खुफिया विभाग के सूत्रों से संपर्क किया और ये वॉट्सऐप पर घूम रही रिपोर्ट का सच तलाशने की कोशिश की. खुफिया विभाग के सूत्रों ने एबीपी न्यूज को बताया कि आईबी की किसी भी रिपोर्ट में इस तरह का प्रारूप नहीं बनाया जाता है. खुफिया ब्यूरो में जब कोई रिपोर्ट कहीं भी भेजी जाती है उसके तीन प्रारूप यानि फॉर्मेट होते हैं.

पहला फॉर्मेट
रिपोर्ट के सबसे ऊपर बांयी तरफ कॉपी नंबर लिखा होता है दायी तरफ यहां पर आईआर नंबर यानि इंटेलीजेंस रिपोर्ट नबंर दिया गया होता है और इन दोनो के बीच मे बोल्ड लैटर्स में इंटेलीजेस ब्यूरो लिखा होता है और उसके ठीक नीचे ब्रैकेट में मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स लिखा होता है.

दूसरा फॉर्मेट
इसमें इंटेलीजेंस रिपोर्ट नंबर के साथ आईबी की किस शाखा ने रिपोर्ट जारी की है उस का नाम भी लिखा होता है. मसलन आईआर नंबर 123 ( आईएस) आईएस यानि इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन प्रोफार्मा में बीच में इंटेलीजेस ब्यूरो के नीचे मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स और फिर उसके नीचे गवर्नमेंट आफ इंडिया लिखा होता है.

तीसरा फॉर्मेट
तीसरे फॉर्मेट में आईबी के वरिष्ठ अधिकारी अपने लैटर हैड पर सूचना भेजते है जिसमें उनका नाम पद और भारत सरकार का चिन्ह बना होता है और ऐसे लैटर में आफिस का लैटर नंबर और यदि ब्यूरो निदेशक की तरफ से लैटर जारी हुआ है तो डीआईबी यूओ नंबर भी लिखा होता है. तीनों प्रोफार्मा में हर पेज पर रिपोर्ट की गोपनीयता के हिसाब से सबसे ऊपर और सबसे नीचे सीक्रेट या टाप सीक्रेट लिखा होता है. रिपोर्ट के अंत में रिपोर्ट जारी करने वाले अधिकारी का नाम तथा पद होता है औऱ उसके बाद लिखा होता है कि रिपोर्ट किस किस विभाग के किस किस अधिकारी को भेजी गई है.

वायरल रिपोर्ट में कहां गलती ?
सोशल मीडिया में खुफिया ब्यूरो के नाम से जो रिपोर्ट वायरल हुई है उसमें डाटा दिए जाने के बाद कान्फीडेंसियल रिपोर्ट लिखा गया है. आईबी में इस प्रोफार्मा के तहत आज तक कोई रिपोर्ट जारी ही नहीं की गई है. साथ ही डाटा के फौरन बाद जो नोट लिखा गया है उस तरह का नोट भी नहीं लिखा गया है. इस रिपोर्ट में हर पैरा के पहले एक छोटी लाइन लगाई गई है जो पूरी तरह से इस रिपोर्ट के प्रोफार्मा को बोगस बताती है क्योंकि इस तरह की छोटी लाइने किसी रिपोर्ट में इस्तेमाल नहीं की जाती.

पड़ताल में वायरल रिपोर्ट झूठी साबित हुई है
आईबी यानि खुफिया विभाग के आला सूत्रों के मुताबिक किसी भी राज्य में हो रहे चुनावों के दौरान कुछ रिपोर्ट जरूर भेजी जाती है औऱ उनमें वहां के राजनीतिक औऱ संवेदनशील स्थानों आदि का ब्योरा भी होता है और ये भी बताया जाता है कि क्या संभावनाये हो सकती हैं लेकिन इस तरह का प्रोफार्मा कभी इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसलिए एबीपी न्यूज की पड़ताल में पंजाब के नतीजे लीक करने वाली वायरल रिपोर्ट झूठी साबित हुई है.

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