2005 का वो यादगार किस्सा जिसके बाद पुलिस भी शर्म से पानी-पानी हो गई थी। इसकी वजह बस ये थी कि उनके अफसर पूर्व IPS डी के पांडा खुद को श्रीकृष्ण की राधा समझते थे।

पूर्व IPS डी के पांडा के साथ काम करने वाले धीरेंद्र बताते हैं, बात 1991 की है, जन्‍माष्‍टमी करीब थी। एक रात भगवान कृष्‍ण पांडा के सपने में आए। तभी से वह घर पर कभी-कभी राधा का रूप धारण करने लगे थे।

शरीर पर साड़ी, मांग में सिंदूर और चूड़ि‍यां पहन लेते थे। इसके अलावा कान में बाली और नाक में नथुनी भी पहनते थे। उनके इस रूप को देखकर सभी डर जाते थे। पहले ऐसा महीने में 1-2 बार ही होता था। लेकिन समय के साथ यह अक्‍सर होने लगा। 2005 में ये सार्वजनिक रूप से राधा रूप में सबके सामने आए। धीरेंद्र ने ये बातें पांडा के घर काम करने वाले कर्मचारियों से बातचीत के आधार पर बताई हैं।

परिवार ने भी तोड़ा नाता, पत्‍नी ने किया था केस
पांडा की पत्‍नी ने साल 2009 में गुजारा भत्‍ता के लिए उनपर केस भी किया था। इसके बाद कोर्ट ने पांडा को अपनी पत्‍नी को संपत्ति का हिस्‍सा और गुजारा भत्‍ता देने का आदेश दिया। इनके दो बेटे हैं। पांडा की मानें तो, दोनों बेटे उनकी कृष्‍ण भक्ति को समझते हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से परिवार ने इनसे दूरियां बना लीं। बाद में आईजी ने खुद को राधा के बजाय मोहन का अवतार भी बताया था।

विभूति खंड पुलिस एन्‍क्‍लेव के फ्लैट नंबर 2/5 में कोई पुलिस अफसर नहीं रहना चाहता था। वे मानते थे कि यह फ्लैट ‘मनहूस’ है। यह वही फ्लैट है, जिसमें ‘दूसरी राधा’ बने आईजी देवेंद्र पांडा रहे थे।बाद में इसमें आईपीएस अधिकारी राम कुमार चतुर्वेदी रहने आए। इसके बाद जब उनको सस्‍पेंड किया गया, तो लोगों ने इस घर के मनहूस होने की बात उठाई। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि घर की खिड़कियां अपने आप ही खुल जाती हैं।

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