अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाहि वबराकातुहु,

आज मैं आप को बताउंगी की कैसे मैं मुसलमान हुई?मैं इस्लाम क़ुबूल करने से पहले ईसाई धर्म से ताल्लुक रखती थी। सब मुझसे पूछते थे की तुम हिजाब क्यू पहनती हो?सब मुझसे यह कहते थे की तुम तो महिलाओं के हक़ के लिए लड़ती थी पर तुम खुद ही मुसलमान हो गई। मैं उनसे ज़्यादा बात नही करती थी।

ऐसा कहा जाता की दुनिया एक महा विस्फोट के बाद ही वजूद में आई। कोई ऐसा नही कह सकता की यह बिलकुल सही है। पर मैं भी इस बात पर यकीन करती हूँ क्योंकि मैं एक विज्ञानं की छात्रा हूँ। मेरे इस्लाम में आने की एक यह भी वजह थी की मैं इस्लाम को समझने के लिए क़ुरआन पढ़ती थी और मुझे क़ुरआन में बहुत सी ऐसी बातें नज़र आई जिनको देखकर मैं हैरान हो गई थी। मैंने देखा की क़ुरआन जो की आज से 1450 साल पहले आई थी पर उसमें ऐसी बातें थी जो विज्ञान आज जान रहे हैं। क़ुरआन में हर बातें साफ़ साफ़ कही गई है।

इस्लाम में आने से पहले मुझे इस बात की कोई भी परवाह नही थी की क्या गलत है और क्या सही है। मैं जो मन में आए वो करती थी और बहुत से गलत कामों से भी मैं जुड़ी हुई थी। जब कोई व्यक्ति दुनिया में आता है तो बहुत लोगों को कुछ सच्चाई पता होती है और बहुत सी बातें हमको नही पता होती हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था मैं अपने ईश्वर को पहचान नही पाई थी पर अल्लाह (सुबहान व ताआला) ने मुझे सही राह दिखाई।

इस्लाम में आने से पहले मेरे दिल में बहुत से सवाल थे।

जैसे की हम क्यू इस दुनिया में आएं हैं?

क्योंकि हमारी दुनिया में आने का कोई तो मकसद होगा, यूँही तो कोई इस दुनिया में नही आता होगा और मर कर चला जाता होगा?

मेरे मन में यह भी सवाल रहता था की क्यू हम सब कहीं न कहीं ईश्वर पर भरोसा और आस्था रखते हैं। मैं सोचती थी की ऐसी कौन सी वजह है और ऐसी कौन सी ताक़त है जिससे की हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं की कोई तो है जो हम पर अपनी कृपा बनाए हुए है और हमपर हर पल नज़र रख रहा है।

कई लोग होते हैं वह सितारों को मानते हैं और कई लोग सूरज को अपना ईश्वर मानते हैं पर मैं यह कहना चाहूंगी की अगर सितारे और सूरज ईश्वर हैं तो वह छुप क्यू जाते हैं। अगर वह छुप जाएंगे तो हमारा ख़याल कौन रखेगा और और हम पर नज़र कौन रखेगा। इसी सोच को लेकर मैं यह सोच में पड़ गई की सच क्या है। और मैं सच की तलाश में निकल गई और धर्मों के बारे में खोज करने लगी।

इंसान जब दुनिया में आता है तो वह अपने आप को सभी चीज़ों का मालिक समझने लगता है। पर जब वह कई परेशानियों में डूब जाता है तो वह ईश्वर के ही पास जाता है।

ऐसा कहा जाता की दुनिया एक महा विस्फोट के बाद ही वजूद में आई। कोई ऐसा नही कह सकता की यह बिलकुल सही है। पर मैं भी इस बात पर यकीन करती हूँ क्योंकि मैं एक विज्ञानं की छात्रा हूँ। मेरे इस्लाम में आने की एक यह भी वजह थी की मैं इस्लाम को समझने के लिए क़ुरआन पढ़ती थी और मुझे क़ुरआन में बहुत सी ऐसी बातें नज़र आई जिनको देखकर मैं हैरान हो गई थी। मैंने देखा की क़ुरआन जो की आज से 1450 साल पहले आई थी पर उसमें ऐसी बातें थी जो विज्ञान आज जान रहे हैं। क़ुरआन में हर बातें साफ़ साफ़ कही गई है।

मैं यह कहना चाहती हूँ की इस्लाम में आने की जैसे सबकी कोई न कोई शुरुवात होती है की इस वजह से वो इस्लाम में आएं पर मेरे इस्लाम में आने की कोई शुरूआती घडी नही थी मैं हंमेशा से ही इस्लाम को थोड़ा थोड़ा सीखती ही रही हूँ।

और इस्लाम की इन्ही बातों से मैं इस्लाम की तरफ हमेशा से ही खींची चली गई। क़ुरआन में हर बात तर्क के साथ है। और उसपर कोई ऊँगली नही उठा सकता है। इस्लाम ने मेरी ज़िन्दगी बिलकुल से ही बदल दी है। हाँ, ऐसा हो सकता है की इस्लाम में आने के बाद आपको कुछ मुश्किलें झेलनी पड़ें पर जिनका ईमान मज़बूत है उन लोगों के लिए ये परेशानियां कुछ भी नही हैं।

मैं एक ईसाई देश में पैदा हुई थी, तो ज़ाहिर सी बात है की सब की इस्लाम को लेकर गलत ही सोच थी। मैं भी इस्लाम के बारे में ऐसा ही सोचती थी। पर जब मैंने इस्लाम को जाना तो मेरा नजरिया ही बदल गया और मैं सब लोगो से भी यही कहना चाहूंगी की बिना जाने इस्लाम को कोई कुछ नही कह सकता। इस्लाम सब के लिए खुला हुआ है।

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