ब्राह्मणवाद दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवाद है. क्योंकि इसकी वजह से जो मार खाता है, उसे कोई शिकायत नहीं है. वह मजे से मार खाता है, ताकि उसका परलोक सुधर जाए. वह अपमानित होता है और अपमानित करने वाले को दक्षिणा भी देता है. इटली के समाजशास्त्री अंतोनियो ग्राम्शी इसे ‘हेजेमनी बाई कंसेंट’ कहते हैं. यानी पीड़ित की सहमति से चल रहा वर्चस्ववाद. इसके लिए सहमति की संस्कृति बनाई जाती है. यही ब्राह्मण धर्म है. बहुजनों की सहमति से अल्पजन का राज. इसका सबसे बुरा असर यह है कि अपार प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद भारत आज दुनिया के सबसे गरीब, निरक्षर, बीमार और लाचार देशों में एक है. जीवन के हर क्षेत्र में सवर्ण वर्चस्व ने देश का बुरा हाल कर दिया है.

क्या आपने कभी सोचा है कि 1946-47 की विश्व इतिहास की भीषणतम सांप्रदायिक हिंसा के दौर में, जब 10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए, तब भी बाबा साहेब जातिमुक्त भारत के बारे में ही लिख रहे थे? बाबा साहेब जानते थे कि भारत के ज्यादातर लोगों की समस्या जाति है. उससे मुक्ति जरूरी है. यही भारत की असली आजादी है. यही राष्ट्र निर्माण है.

लेकिन यूनियन कैबिनेट में कुल 26 मंत्री हैं. जिनमें…

गृहमंत्री : राजपूत

कृषि मंत्री : राजपूत

ग्रामीण विकास: राजपूत

रक्षा मंत्री : ब्राह्मण

वित्त मंत्री : ब्राह्मण

रेल मंत्री : ब्राह्मण

विदेश मंत्री : ब्राह्मण

शिक्षा मंत्री : ब्राह्मण

सड़क परिवहन मंत्री : ब्राह्मण

स्वास्थ्य मंत्री: ब्राह्मण

कैमिकल मंत्री : ब्राह्मण

पर्यावरण मंत्री : ब्राह्मण

खादी मंत्री : ब्राह्मण

कपड़ा मंत्री : ईरानी ब्राह्मण

स्टील मंत्री : जाट

क़ानून मंत्री : कायस्थ

संचार मंत्री : कम्मा(पिछड़ा)

खाद्य मंत्री : दलित

इनकी टैलेंट और मेरिट की फैक्ट्री महाराष्ट्र में लगी है। इन नौ भूदेवों में चार अकेले महाराष्ट्र के. महाराष्ट्र के लोगों को बधाई. मोहन भागवत को पेशवा राज स्थापित होने पर बधाई.

दैनिक जागरण के मालिक ने अखिलेश यादव से पूछा था कि यूपी पुलिस में कितने यादव हैं. अब वे नरेंद्र मोदी से पूछ सकते हैं कि उनकी लगभग आधी कैबिनेट एक ही जाति से क्यों भरी हुई है. 
यादव = 00
कुर्मीपटेल = 00
जाटव = 00
कुशवाहामौर्या = 00

मल्लाहनिषाद = 00
लिंगायत = 00
अंसारीजुलाहा = 00
वन्नियार = 00
कपू = 00
नायर = 00
और संख्या की दृष्टि से ये भारत की कुछ सबसे बड़ी जातियां हैं. ऐसे में 26 में से 9 मंत्री एक ही जाति से बनाना और वह भी उस जाति से जिसकी संख्या काफी कम हैएक गहरे सामाजिक असंतुलन की ओर संकेत करता है.
यह जरूर है मनुस्मृति के हिसाब से चलने वाली केंद्र सरकार कि कैबिनेट मंत्रियों के पदों को पाँच को छोड़कर सभी को सवर्णों से भरने के बादराज्य मंत्रियों यानी जूनियर मिनिस्टर बनाने में सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा गया है  और जूनियर मंत्री पदों पर SC, ST, OBC को जगह दी गई है। लेकिन वहां भी स्वतंत्र प्रभार देने में खेल किया गया है.

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