आगरा: राष्ट्रीय स्वायंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के बीच आपसी रंजिश के कारण बुधवार को आरएसएस नेता ब्रज किशोर लावनिया ने यूपी विधानसभा चुनाव 2017 कके लिए आगरा की फतेहाबाद सीट पर बीजेपी नेता के खिलाफ नामांकन किया है. जनसत्ता के अनुसार, भाजपा ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उनहोंने सपा के पूर्व जिलाध्यकक्ष जितेंद्र वर्मा को प्रत्याशी बनाया है. बता दें कि लावनिया ने पार्टी नेतृत्व् के कैडर कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने तथा बाहरी को टिकट देने के विरोध में ऐसा फैसला लिया है.

लावनिया ने टिकट वितरण से स्थाेनीय कार्यकर्ताओं को नाखुश बताते हुए कहा, मैं निर्दलीय उम्मीयदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहा हूं, बीजेपी के खिलाफ नहीं बल्कि बीजेपी नेतृत्वी के फैसले के खिलाफ, जिसने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया और एक बाहरी को टिकट दिया.

लावनिया ने कहा कि उन्हों ने 2012 विधानसभा चुनावों में भी टिकट मांगा था. मगर अयोध्यास के बाबरी विध्वंहस की वर्षगांठ पर शौर्य दिवस मनाने के लिए 2011 में उन्हेंा दो महीने के लिए जेल भेजा गया था. जिसके चलते उनकी अप्लिकेशन वरिष्ठन भाजपा नेताओं तक नहीं पहुंच सकी. उनहोंने कहा कि वह हिंदुत्वक एजेंडा पर चुनाव लड़ेंगे. उन्होंकने दावा किया, मैं लोगों से वादा करूंगा कि अगर मुझे चुना गया तो मैं फतेहाबाद में राम राज्यड कायम कर दूंगा.

बता दें कि लावनिया संघ और उसकी सहयोगी संगठनों से 1988 से जुड़े रहे हैं. उन्होंनने पिछले 10 साल तक विश्वय हिंदू परिषद के जिला सचिव के तौर पर काम किया है. इससे पहले, वह 8 साल तक बजरंग दल के जिला संयोजक भी रहे थे. बजरंग दल की जिम्मे दारी संभालने से पहले वह सात साल तक आरएसएस के ‘शाखा कार्यवाह’ और ‘मंडल कार्यवाह’ भी रह चुके हैं. वहीँ पिछले साल, विहिप नेता अरुण महौर की मौत पर शोक-सभा के दौरान भड़काऊ बयान देने के लिए लावनिया पर मुकदमा दर्ज किया गया था.

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