इस साल कुछ ही दिनों में हमारे देश में पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे है और इसके लिए देश की सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपना पूरा दम-खम लगा रही है। जब हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था, तब पूरा देश मिलजुल कर अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। उस वक़्त सभी हिन्दुस्तानी आपस में मिलजुल कर रहा करते थे और अंग्रेजों के खिलाफ भी मिलजुल कर लड़ाई लड़ा करते थे।

उस समय भी अंग्रेजों ने भी एक ही नारा दिया था कि, बांटो और राज करों। वैसा ही कुछ आज कि राजनीतिक पार्टियाँ करने में लगी हुई है। कोई धर्म के आधार पर बाँट रही है तो कोई जाति के नाम पर बाँट रही है।

हमारे देश में सबसे ज्यादा धर्म के नाम पर बांटने वाली अभी के समय में मार्कंडेय काटजू के अनुसार, भारतीय जनता ही एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो देश में साम्प्रदायिकता का माहौल पैदा करके तनावपूर्ण स्थिति बनाना चाहती है। लेकिन हमारे देश की शुरू से ही यह परम्परा रही है कि, इस देश में सभी हिन्दुस्तानी मिलजुल कर रहते आ रहे है। लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियाँ अपने फायदे और सत्ता हासिल करने के लिए देश में तनाव का माहौल पैदा करती है ताकि वह अपना वोट बैंक बना सके।

लेकिन आज हम आपको एक विडियो दिखाने जा रहे है जिसे देखने के बाद आपको यह विश्वास हो जायेगा कि, इस देश में रहने वाले हर हिन्दुस्तानी, फिर चाहे वह किसी भी मजहब से तालुक रखने वाला क्यों न हो? वह सब आपस में भाई-भाई की तरह रहते है। एक ब्राह्मण हिन्दुस्तानी ने मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में बताया कि, बाढ़ में फंसने के बाद किस तरह से उनकी मदद एक हिन्दुस्तानी मुस्लिम भाई ने की। इस हिन्दुस्तानी ब्राह्मण ने बताया कि, बाढ़ में फंसने के बाद इन्हें कहीं से भी कोई व्यवस्था नहीं मिली। फिर सात बजे शाम को एक इंसान जिनका नाम यासीन मलिक है जिनकी दाढ़ी थोड़ी छोटी-छोटी है। यासीन मलिक जी आये और उन्होंने पीला चावल, पैकेट उन्होंने फेंका वो नाव पर थे।

वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

फिर जब उन्हें पता चला कि, यहाँ पर डेढ़ सौ आदमी है तो फिर वह वापस गए और 9 बजे वापस आये। इसके बाद उन्होंने जब वह 9 बजे आये तो डेढ़ सौ आदमियों के लिए पीला चावल बनाकर लेकर आये। इसके अलावा वह अपने साथ में बीस बोतल पानी, बिस्किट, दवाई और हर जरुरत की चीज उन्होंने लाकर दी। इसके बाद 9 तारीख को 12 बजे 1 क्विंटल, विश्व में इतना बड़ा मीडिया है लेकिन हमारे यहाँ पर कोई राहत सामग्री नहीं आई। ऊपर हेलीकाप्टर-हेलीकाप्टर घूम रहा, लेकिन एक भी पैकेट माचिस का भी उन्होंने ऊपर से नहीं फेंका। लेकिन यासीन मलिक ने 50 किलो आटा की दो बोरियां लेकर आये। हर जरुरत की चीज उन्होंने लाकर दी। इसके अलावा दूसरी जमात मुस्लिमों की आई और उन्होंने हमें दूध चाय-पत्ती सब लाकर दी।

LEAVE A REPLY