अदिती का रिजर्वेशन जिस बोगी में था , उसमें लगभग सभी लड़के ही थे । टायलेट जाने के बहाने अदिती पूरी बोगी घूम आयी थी, मुश्किल से दो या तीन औरतें होंगी। मन अनजाने डर से कांप सा गया ।

पहली बार अकेले सफर कर रही थी, इसलिए पहले से ही घबराई हुई थी। इसलिए खुद को महफूज रखने के लिए चुपचाप अपनी सीट पर मैग्जीन निकाल कर पढ़ने लगी।

नौजवानों का झुंड (जो शायद किसी कैंप में जा रहे थे) , के हंसी-मजाक, चुटकले उसके हिम्मत को और तोड़ देते थे।

अदिती के डर और घबराहट के बीच अनचाही सी रात धीरे-धीरे उतरने लगी । अचानक सामने की सीट पर बैठे लड़के ने कहा. .
– हेल्लो, मै मोहसिन और आप? ?
डर से पीली पड़ चुकी अदिती ने कहा –जी , मै. . . . . .
कोई बात नहीं, नाम मत बताइए।वैसे कहां जा रही हैं आप? ? ?
अदिती ने धीरे से कहा–“इलाहाबाद”
क्या इलाहाबाद. . . . ? ?

वहां तो मेरी नानी का घर है।इस रिश्ते से तो आप मेरी बहेन लगीं।खुश होते हुए मोहसिन ने कहा। और फिर इलाहाबाद की अनगिनत बातें बताता रहा कि उसके नाना जी काफी सज्जन व्यक्ति हैं, उसके दोनों मामू सेना के उच्च अधिकारी हैं और ढेर सारी नयी पुरानी बातें।

अदिती भी धीरे-धीरे मोहसिन की बातों में दिलचस्पी लेती रही और रात भर उसका हाथ पकड़ के सोती रही।
रात जैसे कुंवारी आयी थी, वैसे ही पाक़(पवित्र) कुंवारी गुजर गयी।

सुबह अदिती ने कहा– लीजिये मेरा पता रख लीजिये, कभी नानी के घर आना तो मिलने जरुर आइयेगा।

कौन सा नानी घर बहन? वो तो मै आपको डरते देखा तो झूठ-मूठ के रिश्ते गढ़ता रहा । मै तो पहले कभी इलाहाबाद आया ही नहीं ।
क्या. . ? – चौंक उठी आदिती ।

बहन ऐसा नही है कि सभी लड़के बुरे ही होते हैं कि, किसी अकेली लड़की को देखा नहीं कि उस पर गिद्ध की तरह टूट पडे़ं। हम मे ही तो पिता और भाई भी होते हैं।
कह कर प्यार से उसके सर पर हाथ रख मुस्कुरा उठा मोहसिन ।

अदिती मोहसिन को देखती रही जैसे कि कोई अपना भाई उससे रुख्सत हो रहा हो, अदिती की आंखें गीली हो चुकी थीं
काश इस दुनिया में सब ऐसे हो जाएं
ना कोई अत्याचार, ना कोई बलात्कार, भय मुक्त समाज का स्वरूप हमारा देश, हमारा प्रदेश, हमारा शहर, हमारा गांव
जहां सभी बेटियां खुले में सांस ले सकें , निडर होकर कहीं भी आ जा सके , जहां हर कोई एक दुसरे का मददगार हो 🙇

तब रिक्शे वाले ने आवाज लगाई बहन कहां चलना है
कालेज तक चलना है भाई ले चलोगे , आज वो डरी नहीं

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